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Anubhav Wani Guru Mahima Naam Pratap

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रामावलंबन


" दया लिया साधै धरम ","दया धरम को मूल है " तथा परहित सरिस धरम नहीं भाई " | ऐसे
इन संत संदेशो को ह्रदयसात कर दया ही को धर्म जानकर परहित एवं परोपकार हेतु श्री
रामकल्याण रामस्नेही "बालक" ने सन २०११ में एक समाज सेवी संस्था की स्थापना की | चूँकि
दुखी व निराश्रित व्यक्तियों का अंतिम आश्रय ईश्वर ही है |

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श्री राम स्नेही धर्म दर्पण


श्री मुलाचार्य के व्दादश शिष्यों में से श्री प्रातः स्मरणीय ,प्रथम पूज्य ,त्याग मंदिर गुरुपदेशपालक, पाप घालक ,पातकपोत डाकनी श्री १००८ श्री मद द्वारकादास जी महाराज जिनके शिष्य श्री १०८ श्री रामरज्जजी के श्री नारायणदास जी, श्री रामरस जी, के श्री अम्रतराम जी महाराज आप की शिष्य परम्परामय पूज्यतम् प्रभावशाली ,प्रशांत चित्त ,सरल प्रकृति ,श्री अमृतराम जी महाराज ..............

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श्री रामकल्याण रामस्नेही "बालक"



बाल संत श्री राम कल्याण जी रामस्नेही "बालक" रामस्नेही संप्रदाय में दीक्षित एक सरल व कर्मठ संत है |
इनका इस संप्रदाय में प्रादुर्भाव १ दिसम्बर २००७ को हुआ |
आपकी दीक्षा महान तपोनिष्ठ संत श्री मुनि जी भगतराम जी "विदेही" के द्वारा १४ वर्ष की उम्र में राजस्थान के भीलवाड़ा शहर स्थित श्री रामद्वारा धाम में अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के वर्तमान पीठाधिश्वर श्री जगतगुरु आचार्य श्री रामदयाल जी महाराज के स्नेहिल सानिध्य में सम्पन्न हुई

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Ramavlamban


'Ramavlamban' is a registered Non-Government & Not-For-Profit Charitable Organization registered under Societies Registration Act. The organization works for helping the needy people of underprivileged sections of society by various means. The aim to see that no human being is deprived of his basic needs because of poverty and the organization also sees to support and nurture the talents which cannot avail of proper facilities because of poverty.

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